सुख ।
समृद्धि ।
स्वावलम्बन ।

सुख । समृद्धि । स्वावलम्बन ।

मुख्यपृष्ठ2018-04-01T16:42:42+00:00

प्रकृति में परस्पर पूरकता को समझकर उसपर आधारित आवर्तनशील खेती को विकसित करना ।
फलस्वरूप परिवार, समाज और विश्व की समृद्धि और प्रकृति का संरक्षण सुनिश्चित करना ।

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हमारी सोच

प्रकृति में परस्पर पूरकता को समझकर उसपर आधारित आवर्तनशील खेती को विकसित करना ।
फलस्वरूप परिवार, समाज और विश्व की समृद्धि और प्रकृति का संरक्षण सुनिश्चित करना ।

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हमारी सोच

. . . क्यूँकि सवा सौ करोड़ की आबादी वाले देश में जहाँ औसत जोत 2 एकड़ है , वहाँ पशु या मानव ऊर्जा से चलने वाले यंत्र ही सबसे "हाई-टेक" हैं ।

हम पशु और मानव ऊर्जा पर आधारित "हाई-टेक" यंत्र बनाते हैं . . .

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हमारा लक्ष्य

. . . क्यूँकि सवा सौ करोड़ की आबादी वाले देश में जहाँ औसत जोत 2 एकड़ है , वहाँ पशु या मानव ऊर्जा से चलने वाले यंत्र ही सबसे "हाई-टेक" हैं ।

हम पशु और मानव ऊर्जा पर आधारित "हाई-टेक" यंत्र बनाते हैं . . .

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हमारा लक्ष्य


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